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  “नाड़ी शोधन प्राणायाम (Anulom Vilom): विधि, लाभ, सावधानियाँ और वैज्ञानिक कारण” Nadi Shodhana Pranayama in Hindi” परिचय नाड़ी शोधन प्राणायाम नाड़ी शोधन प्राणायाम, जिसे अनुलोम-विलोम प्राणायाम के नाम से भी जाना जाता है, योग की एक प्राचीन और शक्तिशाली श्वास तकनीक है। नाड़ी का अर्थ है ऊर्जा का प्रवाह मार्ग। शोधन का अर्थ है शुद्ध करना। इस प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य शरीर के 72,000 से अधिक सूक्ष्म ऊर्जा चैनलों (नाड़ियों) को शुद्ध करना है, जिससे प्राण ऊर्जा (जीवन शक्ति) का प्रवाह सुचारू रूप से हो सके। यह तकनीक मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण और प्रभाव भी निहित हैं। योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है। यह मनुष्य के सम्पूर्ण अस्तित्व को संतुलित करने का विज्ञान है। योग का चौथा अंग प्राणायाम है, जो श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करके न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आत्मिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालता है। प्राणायाम में सबसे प्रमुख और संतुलनकारी अभ्यास है – नाड़...

प्राणायाम के लिए पूर्ण मार्गदर्शन: स्वास्थ्य, शांति और दीर्घायु के लिए अभ्यास Complete Guide to Pranayama: Practice for Health, Peace & Longevity

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प्राणायाम करने के लिए सामान्य दिशा-निर्देश Complete Guide to Pranayama: Practice for Health, Peace & Longevity लेखक: कैलाश बाबू योग योग की विशाल परंपरा में प्राणायाम का विशेष स्थान है। प्राणायाम का अर्थ केवल श्वास लेना और छोड़ना नहीं है, बल्कि यह हमारी नाड़ी तंत्र, मन और प्राण ऊर्जा को शुद्ध और संतुलित करने की एक गहन साधना है। प्राणायाम शुरू करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि हमारे शरीर में नाड़ियों का जाल किस प्रकार कार्य करता है। नाड़ी तंत्र का ज्ञान योग के अनुसार हमारे शरीर में लगभग 72,000 नाड़ियाँ होती हैं। इनमें से 10 नाड़ियाँ प्रमुख मानी गई हैं, और उन 10 में से इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना का विशेष महत्व है। इड़ा (चंद्र नाड़ी) – बाईं नासिका से जुड़ी हुई, शीतल और शांति प्रदान करने वाली। पिंगला (सूर्य नाड़ी) – दाईं नासिका से जुड़ी हुई, उष्णता और ऊर्जा प्रदान करने वाली। सुषुम्ना नाड़ी – रीढ़ की हड्डी के ...